Homeopathic treatment in homeopathy

Motion Sickness | मोशन सिकनेस , यात्रा सम्बन्धी मतली का होम्योपैथिक उपचार

मोशन सिकनेस , यात्रा सम्बन्धी मतली का होम्योपैथिक उपचार

घूमना फिरना और सफ़र करना हर किसी को पसंद होता है परंतु, किसी किसी को सफल करने के नाम से भी डर लगता है । सफर में जी घबराना चक्कर आना और उल्टियां परेशान कर देती है, विशेष तौर पर बस या कार का लंबा सफर ।किसी किसी को चक्कर आते हैं या सिर में दर्द हो जाता है कई बार तो पेट्रोल डीजल की तेज गति से भी मोशन सिकनेस ( उल्टियां )होती हैं। बच्चों और महिलाओं में यह देखने को मिलता है कि किसी किसी के रेल के सफर में भी जी घबराता है ।

मोशन सिकनेस का प्रभाव हर किसी पर अलग-अलग हो सकता है। किसी को पसीना अधिक आता है किसी को बेचैनी सिर दर्द उबासियां सांस लेने में तकलीफ सी होती है। सामान्य तौर पर उल्टी होना या जी मचलना अधिकतर लोगों को होता है। किसी किसी को तो बस या कार में बैठने के नाम से ही जी मचलना शुरू हो जाता है।
आज मैं आपको होमियोपैथी की दवा बताने जा रहा हूं, आप सफर में जाने से पहले इन दवाओं का सेवन करें, आपकी उल्टी या जी मचलना आदि मोशन सिकनेस में लाभ होगा ।

दवाइयां: सफर में जाने से एक दो दिन पहले होमियोपैथी की Cocculus Indicus 30 की 5 बुँदे सुबह, दोपहर, शाम को लें । आप इस दवा को सफर के दौरान भी दो-दो बूंद जल्दी-जल्दी ले सकते हैं, इसके साथ आप WSI कंपनी की Alpha MS की 1 गोली जल्दी जल्दी ले सकते हैं।

wrist_pain_homeopathy_treatment

Wrist Pain Treatment in homeopathy, कलाई के दर्द का होम्योपैथिक उपचार

दर्द शरीर में कही भी हो परेशानी तो सभी से होती हैं परन्तु दर्द जब कलाई पर होने लगे तो तकलीफ और बढ़ जाती हैं, वैसे कलाई में दर्द होना एक आम बात हैं , अक्सर लोग अधिकतर समय कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करते हैं। जिसके कारण अंगुलियों में अक्सर दबाव पढता है और इस कारण कलाई में दर्द होने लगता हैं, कलाई में दर्द होने पर व्यक्ति न तो कोई कम कर पाता हैं न ही कोई भार उठा पाता हैं । कई बार मांसपेशिया कमजोर होने लगती है जिस कारण भी दर्द होता हैं।

दर्द के कई कारण हो सकते हैं:-

जब भी अंगूठे के पिछले हिस्से में दर्द होने लगे तो
कलाई के बाहरी भाग में
दर्द व सुजन होना
कभी तेज व कभी हल्का दर्द होना
अचानक से चुभन वाला तेज दर्द होना
अंगूठे पर दवाब पड़ने से

आदि कई लक्षण हो सकते हैं

आप कलाई में दर्द होने पर इस विडियो में डॉ पाठक जी द्वारा जो व्यायाम बताया गया हैं उसे शुरू करे पर ध्यान रहे की यदि दर्द वाले हिस्से में सुजन ज्यादा है तो आप व्यायाम न करे और दर्द होने पर व्यायाम तो कर सकते है परन्तु सहन कर सकने योग्य ही दर्द सहन करें अन्यथा यदि आपने दर्द होने पर ज्यादा व्यायाम किया तो दर्द कम होने की जगह और बढ़ सकता है ।

दवाईयाँ
कई बार शरीर में दर्द कैल्शियम कम होने के कारण भी हो सकता हैं इसके लिए आप सबसे पहले Calcarea Phosopherica 6x की 4 गोली सवेरे, दिन में और शाम को 3 बार ले । यदि इससे आराम न मिले तो आप Dr Reckeweg का R. No. 11 की आधे कप पानी में 20बुँदे सुबह, दोपहर और शाम को लें ।

lipoma treatment by homeopathy

Lipoma treatment by Homeopathy,

त्वचा के भीतर हुए फोड़े की तरह दिखने वाला या सामान्य, सी उभरी हुयी गाँठ को ही लिपोमा कहा जाता हैं , या इसे चर्बी वाली गाँठ भी कहा जाता हैं । आमतौर पर यह एक स्थान पर होती हैं तो इस पर गौर भी नहीं किया जाता हैं । यह शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकती हैं ,इन गांठो में दर्द तो नहीं होता है परन्तु इन्हे स्किन के अंदर महसूस किया जा सकता हैं। कई बार यह रबर की तरह सॉफ्ट होते है जो हाथ लगाने पर अपनी जगह से थोड़ा इधर उधर हिलते है, परन्तु कई बार यह ठोस होते हैं। शरीर के किसी भी हिस्से पर यह गांठे हो तो इसका उपचार सिर्फ होमियोपैथी में सम्भव हैं। इनका आकर लगभग 1cm से 4cm तक कुछ भी हो सकता हैं

दवाईयाँ : इन गाँठो के लिए आप Acid Hydrofluorine 10m की 4 पुड़िया या 1/2 dram गोली भी ले सकते हैं, पुड़िया हैं तो पुड़ियों को आप 10 -10 मिनट के अंतर से खाये। अगले दिन से Calc Fluor 6x की 4 -4 गोली तीन बार , इसके साथ Silicea 6x की 4 -4 गोली तीन बार लें। इसके साथ Corium Q को आधे कप पानी के साथ 10 बुँदे सुबह , 10 बुँदे शाम को लेनी हैं। यदि, 90 दिन दवा लेने के बाद भी लिपोमा ठीक नहीं हुआ हैं तो आप 90 दिन के बाद Acid Hydrofluoric 10m की 4 पूड़ियाँ ले सकते हैं।
धन्यवाद

Acid Hydrofluorine 10m : 4 पुड़िया
Calc Fluor 6x : 4 -4 गोली , 3 बार
Silicea 6x : 4 -4 गोली , 3 बार
Conium Q : 10 -10 बुँदे , सुबह /शाम

 

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homeopathic treatment for sore throat and fever in cold

Sore throat and Fever in cold : ठंडो में गले की खराश व बुखार का होम्योपैथिक उपचार

 

गले में दर्द बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी हो सकता हैं । गले में दर्द सामान्य सर्दी का संकेत भी हो सकता हैं और वोकल कोर्ड में इन्फेक्शन भी हो सकता हैं , ठण्ड के मौसम में कई तरह की छोटी छोटी बिमारियाँ होती रहती हैं । जिनमें से गले का संक्रमंड व बुखार एक सामान्य रोग होता हैं , यह रोग खासकर उन लोगो को होता हैं , जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी पॉवर ) कमजोर होती हैं ।

लक्षण :

  • गले में इन्फेक्शन या दर्द होना
  • गले के अंदर से लाल व कुछ सुजा हुआ सा होना
  • गले में चुभन होना गले के साथ कान तक दर्द होना
  • निगलने में कठिनाई होना
  • हल्की खांसी व खराश महसूस होना
  • बुखार होना
  • शरीर टुटा टुटा सा होना
  • सर दर्द बने रहना
    आदि अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं या सिर्फ गले में दर्द होना भी हो सकता हैं ।
    ठण्ड के मौसम में अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए ठण्ड न लगे इस बात का ध्यान रखे ।

दवाइयाँ:
ठण्ड में गले में दर्द या बुखार के लिए होमियोपैथी की Merc. Bin. Iod. 30 (इसे Merc. iod. Ruber भी कहा जाता हैं ) की 2 बुँदे , 3 बार (सुबह , दोपहर व शाम ) लें , गले दर्द ज्यादा हैं तो आप इसे दिन में 3 से लेकर 6 बार तक लें सकते हैं (3 दिन से लेकर 5दिन तक )। इसके साथ Ferrum Phos,6x की 4 गोली और SBL कंपनी का Tonsilat Tab की 2 गोली को एक साथ आधे कप गरम पानी में घोलकर गरारा करके पीना हैं ।
Merc. Bin. Iod. 30 : 2 बुँदे , 3-6 बार
Ferrum Phos,6x की 4 गोली + Tonsilat Tab की 2 गोली को मिलकर गरारा करके पीना हैं ।

मोटापे, Obesity Homeopathic Treatment

सभी की दिनचर्या कुछ ऐसी हो गयी है की किसी किसी को ओवरवेट ( मोटापे )की समस्या कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है। आजकल के बच्चों में भी ओवरवेट की समस्या होने लगी है ,मोटापा बढने का मुख्य कारण है सही आहार न लेना , पहले तो पता ही नही चलता की वजन बढ़ रहा है और जब पता चलता है , तो शुरू हो जाते है जिसने जो उपाय बताये वो उपाय करने के लिए।
ऐसा माना जाता है की मीठा खाने से वजन बढ़ता है , तो कुछ लोग मीठा खाना एक दम बंद कर देते हैं , मीठा (शुगर ) का एकदम बंद होना भी सही उपाय नही हैं ।
कारण व लक्षण :
शरीर की लम्बाई व उम्र के हिसाब से अलग अलग वजन की सूची आपको मिल सकती हैं । सबसे मुख्य कारण है सही आहार न खाना , कब्ज रहना , व्यायाम न करना , अधिक फ़ास्ट फ़ूड , जंक फ़ूड , वासा युक्त भोजन खाना , ज्यादा मात्रा में शुगर (मीठा) खाना , शराब , ज्यादा मात्र में पीना भी हो सकता है (पुरुषो में ), डायबिटीज होना आदि कारण भी हो सकते हैं , मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति घर के कार्य तो क्या वो अपने निजी कार्य करने में भी सक्षम नही हो पाता है।

दवा :
होम्योपैथिक की सबसे पहले आप Calc. Carb. 200 को दिन में 2 बुँदे 3 बार (दो बूंद सुबह ,दो बूंद दोपहर , दो बूंद शाम ), 10 मिनट के अंतर से लें, इसके अगले दिन Phytolacca Berry की 1 गोली दिन में 3 बार (1 गोली सुबह, एक गोली दोपहर में, एक गोली शाम को ), इसके साथ Fucus Vesiculosus 1x की 1 गोली 3 बार ( एक गोली सुबह , एक गोली दोपहर, एक गोली शाम ) लें। आपको लाभ मिलेगा। पैदल चलना, व्यायाम व योगा रोज करे इसके साथ अपना भोजन एक साथ बहुत ज्यादा खाने की जगह थोडा थोडा करके दिन में 3 बार खाये, पानी ज्यादा पिएं।

homeopathic treatment for hair problems

Hair Problems, बालों की समस्या का होम्योपैथिक उपचार

सामान्य तौर पर कंघी करते समय या बाल बनाते समय , बालों का गिरना एक सामान्य प्रक्रिया हैं परन्तु, यदि बालों की संख्या तेजी से गिर रही हैं तो यह चिंता का विषय हैं पुरुषो या स्त्रीयों में यदि सामान्य से ज्यादा मात्रा में बाल झड रहें हैं तो यह गंजापन का कारण भी बन सकता हैं।

बालो की जड़ो में पोषण की कमी के कारण यह समस्या उत्पन्न होती हैं ।

कारण : बाल झड़ने का मुख्य कारण

  • शरीर में पोषण तत्वों की कमी होना
  • बालों में रुसी होना
  • प्रदूषण बढने के कारण
  • तरह -तरह के शैम्पू / तेल इस्तेमाल करने के कारण
  • शारीरिक मानसिक तनाव के कारण
  • बढती उम्र के कारण भी बाल झड़ते हैं
  • इन्फेक्शन या फंगल इन्फेक्शन के कारण
  • मौसम बदलने के कारण
  • कई बार थाइरोइड रोग होने के कारण भी ज्यादा झड़ते हैं आदि

बाल झड़ने के अन्य कारण भी हो सकते हैं , परन्तु यदि  समय पर इसका उपचार नही कराया गया तो यह चिंता का विषय बन सकता हैं।

उपचार :
इसमें आज बस एक तेल बताने जा रहे हैं , जो BT company का Zauberel oil हैं , इसके अन्दर 2 बोतल हैं , जिसमे से आप बड़ी बोतल को हफ्ते में 2-3 बार या रोज भी लगा सकते हैं , तथा छोटी बोतल में से हफ्ते में एक बार ही लगाये।

बच्चों के देर से बोलने का होमियोपैथी उपचार

बच्चों के देर से बोलने का होमियोपैथी उपचार

इस वीडियो में मैंने जो बच्चें देर तक बोल नहीं पाते हैं, कितनी कोशिश करने के बावजूद बच्चों को बोलने में परेशानी होती हैं उनके लिए इसमें दवाई बतायी गयी हैं । होम्योपैथिक में बच्चों की इस परेशानी बहुत ही उच्च उपचार होता हैं । सामान्य तौर पर सभी बच्चे एक से नहीं होते यानि कुछ जल्दी बोलना शुरू कर देते हैं ,कुछ थोड़ा देर में शुरू करते हैं , परन्तु यदि बच्चों के बोलने में ज्यादा देर होती है , तो आप बिना देर किये होम्योपैथिक की ये दवाईया खिलाइये उन्हें लाभ होगा ।

दवाइयाँ : Syphilinum 1m की 6 पुड़िया बनवा कर सवेरे 10 -10 मिनट के अंतर से 3 पुड़िया खिलानी है , उसी तरह से बची हुई 3 पुड़िया को शाम को खिलाना है । दूसरे दिन से five phos 6x की 4 -4 गोली दिन में 3 बार दे और इसके साथ Calc Phos 6x की भी 4 -4 गोली दिन में 3 बार दें , और यदि 60 दिन तक भी बच्चा नहीं बोलना शुरू करते है तो दुबारा Syphilinum 1m की 6 पुड़िया दे सकते है ।

Syphilinum 1m: 6 पुड़िया
five phos 6x : 4 -4 गोली 3 बार
Calc Phos 6x: 4 -4 गोली 3 बार

Ulcer treatment

Ulcer, Homeopathic treatment | Sahas Homeopathic

पेप्टिक अलसर के बारे में हम पहले बता चुके है । सामान्य, भाषा में पेट में होने वाले घावों या छालों को पेप्टिक अलसर कहा जाता है । यदि समय पर इसका सही उपचार नही कराया गया तो आने वाले समय में ये और भी परेशानी उत्पन कर सकते है ।

लक्षण : पेट में लगातार दर्द रहना
भूख का कम लगना
गैस बनना , उल्टी होना
वजन का लगातार कम होना
पेट फूलना आदि
पेप्टिक अलसर के दिखने वाले सामान्य लक्षण है

कारण : ज्यादे मसाले युक्त भोजन करना , मदिरा पान का सेवन करना, पानी कम पीना .

Mumps treatment

Mumps Homeopathic treatment

कनफेड जिसे मम्प्स या गलसुआ भी कहते है। यह रोग एक वायरस से होने वाला एक संक्रमण रोग है, यह मुख्य रूप से व्यक्ति की लार ग्रंथि को प्रभावित करती है । सामान्य भाषा में कान के पीछे पेरोटीड ग्रंथि में सुजन आ जाती है। यह मुख्य रूप से 5 से 15 वर्ष में ज्यादा पाया जाता है । इसमें दर्द भी होता है, यदि किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में व्यक्ति आ जाये तो संभवतः बात करते समय उस व्यक्ति के मुँह से निकलने वाले जीवाणु सामने वाले व्यक्ति में भी प्रवेश कर जाये तो वह भी इस रोग का शिकार हो सकता है ।

इस रोग के मुख्य लक्षण है :- भूख न लगना , गला खराब होना, बुखार, मुँह खोलते समय दर्द होना, कान के पीछे दर्द होना , खाना खाते समय या पानी पीते समय दर्द होना ।

चिकित्सा : इस रोग के होने पर आप होम्योपैथिक की Paroticlium 30 की २-dram बनवा कर 4-4 गोली 3 बार ले , इसके साथ Silicea 6x और Calc. Flour. 6 की 4-4 गोली मिला कर दिन में 3 बार ले , आप Paroticlium 30 को केवल २ dram ही खाए, परन्तु silicea 6x और Calc. Flour. 6 को लगातार कुछ समय तक खाए, आपको फायदा जरुर होगा ।

दवा के साथ साथ व्यक्ति को थोड़े धर्य की आवश्यकता भी होती है और यदि आप किसी इसे व्यक्ति के संपर्क में आ जाये तो अपनी सुरक्षा के लिए मास्क का प्रयोग करे और यदि आपके घर पर कोई इस रोग से पीड़ित है तो उसे भी मास्क जरुर पहना के रखे ताकि उसके मुँह के जीवाणु किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित न हो सके.

homeopathic treatment for dizziness

Dizziness , Homeopathic treatment

होमियोपैथी में चक्कर आने की बहुत ही अच्छी दवा उपलब्ध है , चक्कर चाहे किसी भी कारण से आये , चाहे वो कमजोरी के कारण हो या चाहे सर दर्द के कारण , होम्योपैथिक दवाओं के सेवन से व्यक्ति को तुरंत आराम मिल जाता है , अगर चक्कर सर्वैकिल के कारण हो रहा है तो आप थोडा व्यायाम करे ताकि जल्द ही आपको आराम मिल सके ।

चिकित्सा : सबसे पहले आपको किसी भी वजह से चक्कर आ रहे है तो आप अकेले न रहे और होम्योपैथिक की Theridion 30 की २ dram बनवा कर ले और उसकी 4 गोली जल्दी जल्दी ले (चक्कर आने पर 5-5 मिनट के अंतर में ) , साथ में Mag. Phos 6x की 4-4 गोली 3 बार , चक्कर बंद हो जाने पर आप Theridion को बंद कर दे , परन्तु Mag Phos. 6x को कुछ समय तक लगातार लेते रहे । अपना पूरा इलाज किसी होम्योपैथिक चिकित्सक से करवाए, अपना ध्यान रखे ।