Cervical Spondylosis, गर्दन व पीठ दर्द का होम्योपैथिक एवं एक्यूप्रेशर द्वारा उपचार

Cervical Spondylosis, गर्दन व पीठ दर्द का होम्योपैथिक एवं एक्यूप्रेशर द्वारा उपचार

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस गर्दन के आसपास के मेरुदंड की  हड्डियों की असामान्य बढ़ोतरी और सर्विकल के बीच कशानो (इसे इन्तेर्वेत्र्ब्ल डिस्क के नाम से भी जाना जाता है ) कैल्शियम का डी जनरेसन और अपने स्थान से सरकने की वजह से होता है। यह दर्द गर्दन से शुरू होकर हाथो तक जाता है  लगातार लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर बैठकर काम करना या लंबे समय तक गर्दन झुका कर बैठे रहने से यह समस्या होती है इसका दर्द इतना तेज होता है कि रोगी व्याकुल हो जाता है ।

लक्षण
गर्दन में तेज़ दर्द जो कंधो व हाथों तक हो जाती है, गर्दन में अकड़न, सर को हिलाने में परेशानी, सिर में तेज दर्द, जी मचलना, उल्टी आना, चक्कर आना, मांसपेशियों में ऐंठन, हाथों में सुन्नपन, आदि  लक्षण हो सकते हैं। इसलिए मेरे साथ हरीश पाठक जी ने भी इस गंभीर समस्या से छुटकारा पाने हेतु कुछ आसान व्यायाम बताएं हैं। आप होमियोपैथी  दवाई के साथ ही साथ इन व्यायामों को आराम से शुरू करके करें। आपको इससे सभी लक्षणों से छुटकारा मिल जाएगा।

दवाइयां: इस तरह के कुछ भी लक्षण होने पर आप होम्योपैथिक की  R.S. Bhargava कंपनी की spondin drops  को आधे कप पानी में मिलाकर 20 बुँदे सुबह, दोपहर, शाम को लें । आपको आराम मिलेगा।

Homeopathic treatment for Hirsutism

Hirsutism treatment , चेहरे में बाल का होम्योपैथिक उपचार

महिलाओं व युवतियों के शरीर व चेहरे पर हल्के बालों का होना एक सामान्य बात है। परंतु, जब इनमें विधि होने लगे तो समझ लीजिए कि शायद आपको दवा की जरूरत है। महिलाओं के चेहरे पर हल्की दाढ़ी व मूंछ दिखाई देती है, आप सभी यह जानते होंगे कि हर स्त्री में भी एंड्रोजन नामक एक मेल हार्मोन होता है। हार्मोन के लवण बढ़ते हैं, तब महिलाओं के चेहरे पर व शरीर पर बालों की संख्या बढ़ जाती है। कुछ औषधियां क्रीम भी आपको इस समस्या से निजात दिला सकती हैं। पर, कई बार इनके इस्तेमाल से आपके चेहरे पर फुंसियां निकल सकती हैं।

हार्मोन का बदलाव : युवावस्था (जब लड़कियों में मासिक चक्र शुरू होने लगता है) या रजोनिवृत्ति और गर्भावस्था के दौरान शरीर में हारमोंस में बदलाव आता है जो अतिरोमता का कारण हो सकता है। इसके अलावा एंडोक्राइन ग्रंथि, पिट्यूटरी ग्रंथि थायराइड तथा अग्न्याशय ग्रंथि के प्रभावित होने से यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।
आइए जानते हैं इस समस्या से छुटकारा पाने का होम्योपैथिक निदान।

दवाइयां: Sepia 30 की दो बूंद सुबह, दोपहर, शाम, तीन बार लें Pulsatilla 200 की 5 बुँदे दिन में केवल एक बार लें, इसके साथ Oleum Jac 3x या 6x की दो गोली सुबह, दोपहर, शाम को ले। साथ में Sabal serrulata Qआधा कप पानी में 10 बुँदे, ३ बार (सुबह, दोपहर, शाम) लें इसे 1 महीने तक लगातार लें और फिर बंद कर दें और एक बात का ध्यान रखिए कि Sepia 30 और Pulsatilla 200 को 15 दिन लेने के बाद बंद कर दे और अगर जरूरत लगे तो 15 दिन छोड़कर दोबारा ले सकते हैं।

homeopathic treatment for Ovary Cyst

Ovary Cyst : Homeopathic treatment

ओवरी सिस्ट या अंडाशय में सिस्ट महिलाओं के अंडाशय में बनने वाले सिस्ट होते हैं जो बंद थैली नुमा ( Sac like) आकृति से होते हैं । इनके  अंदर तरल पदार्थ भरा होता है। अंडाशय महिलाओं की प्रजनन प्रणाली ( बच्चा पैदा करने )का हिस्सा होते  है ,यह गर्भाशय के दोनों तरफ पेट के निचले हिस्से में होते हैं । इनकी संख्या 2 होती है जो अंडे के साथ ही साथ एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का निर्माण करते हैं ।

अंडाशय सिस्ट (ओवरी सिस्ट) के तब तक कोई लक्षण या संकेत नहीं दिखते जब तक वह अधिक बड़े ना हो जाए अधिकतर ओवरी सिस्ट कैंसर का कारण नहीं होते हैं । परंतु,  इसका उपचार कराना बहुत जरूरी होता है।

लक्षण:

पेट में दर्द होना
पेट में सूजन होना
अपच होना
कमर का आकार बढ़ना
पेट के निचले भाग ओवरी में तेज दर्द होना
कभी-कभी उल्टी व गैस बनना
अनियमित महावारी होना
वजन घटना
ओवरी सिस्ट कई प्रकार के हो सकते हैं या तो आपको अल्ट्रासाउंड द्वारा पता चल सकता है। एलोपैथिक में सिस्ट छोटी हो या बड़ी इसका एक निदान है ऑपरेशन परंतु, होमियोपैथी में आप इसे  दवाई द्वारा भी  ठीक कर सकते हैं ।

दवाइयां : Acid Flour 1M की दो बुँदे 4 बार 10 मिनट के अंतर से लें ( अगर सिस्ट सही नहीं होता तो आप महीने बाद इस दवा को दोबारा ले सकते हैं) इसके अगले दिन Ovarinum 6 में (ना मिले तो थी 30 पावर ) 2 बुँदे , ३ बार (सुबह, दोपहर, शाम )को  10 दिन तक लें।  इसके साथCalcarea  flour 6x और Silicea 6x (धीरे-धीरे इनकी पावर 6x के बाद 12x फिर 30x  करते जाएं ) कि 4 गोली 3 बार (सुबह, दोपहर, शाम ) यदि आपकी menses रेगुलर नहीं है आती है तो आप Pulsatilla Q को पानी के साथ 15 बुँदे . तीन बार लें (सुबह दोपहर शाम) और अगर आपको इसके कारण ज्यादा ब्लीडिंग हो तो आप Thlaspi Bursa Pastoris Q की 10बुँदे   ३ से लेकर 6 बार तक ले सकते है । आपको इन दबाव से जरूर फायदा होगा।

Polycystic ovary syndrome treatment

PCOD(Polycystic Ovarian Disease) homeopathic treatment |

आजकल हर दस महिला या युवतियों में से एक को PCOD पॉलीसायस्टिकओवरी सिंड्रोम/पॉलीसायस्टिकओवरी डिजीज होता हैं। भागदौर भरी जिंदगी , इतनी व्यस्त व तनावपूर्ण लाइफस्टाइल के चलते अक्सर युवतियाँ या महिलायं अपनी सेहत का सही तरह से ध्यान नही रख पाती हैं , जिस कारण कई समस्यायें होती हैं कई पर तो ध्यान भी नही दिया जाता हैं , शुरुआत में तो यह सामान्य सी दिखाई देती हैं परन्तु यदि समय पर उपचार नही कराया गया तो आगे चलकर यह एक गंभीर समस्या बन जाती हैं , यह महिलाओं के हार्मोनल गड़बड़ी के करण पायी जाती हैं। इसमें महिलाओ के शरीर में मेल हारमोंस (androgen) का स्तर बढ़ जाता हैं , और साथ में ओवरीज में एक से ज्यादा सिस्ट हो जाते हैं ।

लक्षण : अगर लक्षणों (symptoms) की बात करें तो कई बार पता ही नही चल पता की ये समस्या हो रही हैं, पर जो लक्षण नजर आते हैं उनमे से कुछ जसे :- वजन बढ़ना , अनियमित पीरियड्स (कभी कम , कभी ज्यादा , कभी महीनो तक न होना ), शरीर व चेहरों पर बालों का बढ़ना , तैलीय त्वचा होना , चेहरे पे मुहासे होना , बालों का झड़ना , ओवरी पर सिस्ट होना, ब्लड प्रेशर का बढ़ना आदि लक्षण हो सकते हैं ।

यदि आपको इसे कुछ लक्षण नजर आये तो आप अपना टेस्ट कराएँ व निम्मं होम्योपैथिक दवाये खाए

दवाये : सबसे पहले आप Pulsatilla की 5 बुँदे सवेरे खली पेट लें, इसके साथ Janosia Ashoka Q की आधे कप पानी में 1o बुँदे , 3 बार (सवेरे , दिन में , शाम को ) लें । इसके साथ आप Ova tosta 3x की 2 गोली , 3 बार ( सवेरे , दिन में , शाम को) और B.C – 15 की 4 गोली सवेरे, दिन में और शाम को लें।

Pulsatilla: 5 बुँदे सवेरे
Janosia Ashoka Q: 10 बुँदे, 3 बार
Ova tosta: 2 गोली, 3 बार
B.C – 15: ४ गोली 3 बार

 

cold Urticaria

Cold Urticaria , ठण्ड के मौसम में हाथ-पैर की अंगुलियों में सुजन या दर्द का होम्योपैथिक उपचार

जैसे ही ठन्डे का मौसम आता है , अपने साथ बहुत से रोगों को भी लाता हैं , इनमे से कुछ सामान्य रोग होते हैं और कुछ असामान्य होते हैं , यदि इन रोगों या परेशानी पर ध्यान नही दिया जाता तो यह और बढ़ जाते हैं , अक्सर ठण्ड के मौसम में जब ज्यादा ठण्ड होती हैं तो कई लोगो के हाथ और पैरों की अंगुलियों में सुजन , लालिमा , और खुजली के साथ साथ तेज दर्द होता हैं , इसके साथ ही साथ अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं , जब आपको या को भी इस तरह की कोई परेशानी हो तो आप तुरंत होमियोपैथी की दवाईयाँ ले ताकि आपको इस परेशानी से जल्द से जल्द छुटकारा मिल सके , ठण्ड बढने पर आप खुद भी इस बात का ध्यान रखे की आपको ठण्ड से बचना हैं , और आप होमियोपैथी में ये दवाएं ले आपको इनसे जरुर लाभ होगा

दवाईयाँ :
सबसे पहले आप Petroleum 30 की 5 बुँदे सवेरे , 5 बुँदे दिन में, और 5 बुँदे शाम को और साथ में Nat. Sulph. 6x की 4 गोली सवेरे , 4 गोली दिन में , और 4 गोली शाम को लें
अगर अंगुलियों में खुजली , लालिमा किसी ज्यादा हैं , तो आप Petrolium Cream को लगा भी सकते हैं

  • Petroleum 30 : 5 बुँदे सवेरे , दिन में , और शाम को
  • Nat. Sulph. 6x : 4 गोली सवेरे , दिन में , और शाम को
  • Petroleum Cream : लगाना हैं
homeopathic treatment fo piles

Piles treatment, बवासीर का होम्योपैथिक उपचार

बवासीर को piles या hemorrhoids कहा जाता है। यह रोग अधिकतर 45 से 65 वर्ष की आयु वालो को होता है , परन्तु आजकल यह समस्या किसी को भी हो जाती है। जब गुदा और मलाशय की नसों में किसी कारण सूजन और इन्फ्लेम्शन होने लगता है तब यह रोग उत्पन्न होता है।
बवासीर दो प्रकार की होती है :-
बाहर की बवासीर : बाहर की बवासीर में रोगी के गुदा द्वार के आस पास मस्से होते है , जिनमे दर्द तो नहीं होता परन्तु खुजली होती रहती है , ज्यादा खुजलाने की वजह से कई बार इन मस्सो से खून भी निकल आता है ।

अंदर की बवासीर : इसमें गुदा के अन्दर मस्से होते है , मल करते समय ज्यादा जोर लगाने पर ये मस्से फट जाते है , जिस कारण दर्द होता है व खून भी निकलता है।

कारण :

  • आलस्य  या शारीरिक गतिविधि कम करना।
  • लगातार कब्ज रहना।
  • मोटापा।
  • गर्भावस्था।
  • पानी कम पीना।
  • भोजन में फाइबर की कमी होना।
  • जंक फ़ूड।
  • ज्यादा मिर्च मसाला (गरिष्ट भोजन का सेवन )।
  • रात को ज्यादा देर तक जागना आदि बवासीर के कारण हो सकते है।

होम्योपैथिक में इसका उपचार संभव हैं:

दवाईया:  होमियोपैथी में आप सबसे पहले Aesculus. Hipp 200 की 5 बुँदे सुबह , शाम लगातार 1 माह तक लें इसके साथ आप WSI की Aesculus Pentarkan की 20-20 बुँदे दिन में 3 बार आधे (1/2 ) कप पानी के साथ लें। इसी के साथ बायो-कॉम्बिनेशन (B.C) 17 की 4-4 गोली दिन में 3 बार लें , B.C -17 के साथ SBL कंपनी की F.P tab की 2-2 गोली दिन में 3 बार लें।

urine incontinence treatment in homeopathy

Urine incontinence , मूत्र असंयम का होम्योपैथिक उपचार

यूरिन असंयम या यूरिन को न रोक पाने के लिए, ओवर एक्टिव ब्लैडर, तंत्रिका की क्षत, मूत्र मार्ग का संक्रमण, पेल्विक की मसल्स कमजोर व बढ़ती उम्र जैसे कई कारण हो सकते हैं। युरिन को रोक ना पाना वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति का अपने यूरिन पर नियंत्रण नहीं रहता, यह एक समान समस्या है पुरुषों में तो यह समस्या 60 वर्ष के बाद यदि उनके प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ते हैं तब देखने को मिलती है। परंतु कई महिलाओं में यह आम समस्या है ज्यादातर महिलाएं झिझक के कारण इस समस्या को नहीं बता पाती है। अधिकतर यह कब्ज और दस्त जैसी समस्याओं से पैल्विक मांसपेशियों पर खिंचाव बढ़ता है जिसके कारण मूत्राशय उतेजित होता है यूरीन रोकना पाने की परेशानी बढ़ जाती है।
लक्षण: इसके कुछ खास लक्षण नजर आने वाले नहीं होते यूनियन रोक ना पाना यूरिन के लिए भाग कर जाना कई बार पेट में दर्द आदि लक्षण नजर आते हैं
वैसे तो यूरिन जितनी ज्यादा आये शरीर के लिए उतना ही अच्छा है क्यूकी ये शरीर की गंदगी को बाहर निकालने का रास्ता है परंतु किसी को यदि काम आए तो वह भी नुकसान और यदि किसी को यह इतना आए की रोक ना पाए तो उससे भी नुकसान होता है तो आज मैं आपको अपने वीडियो के माध्यम से यूरिन रोक ना पाने का इलाज बताने जा रहा हूं।
दवाइयां : यदि आप भी इस समस्या से पीड़ित हैं तो आप staphysagria 200 की आधे कप पानी में 5 बुँदे सुबह और शाम को लें (इस दवा को केवल 15 दिन ही लेनी है)। इसके साथ आप Equisetum Q को आधा कप पानी में मिलाकर 10 बूंदें सुबह दोपहर शाम को लें।आपको आराम मिलेगा।

Homeopathic treatment for Anal Fissure

Anal fissure, गुदा में दरार या गुदाचीर | Homeopathic treatment

सामान्यतः , लोग गुदा अर्थात एनल सम्बन्धी किसी भी समस्या को बवासीर मान लेते है , परन्तु एनल सम्बन्धी हर समस्या बवासीर नहीं होती हैं। Anal fissure को हिंदी में गुदा में दरार या गुदाचीर भी कहा जाता हैं पाचन तंत्र के विभिन्न रोगों जैसे gastritis , पेप्टिक अलसर , बवासीर , गुदा दरारे हो सकते है। पुरानी कब्ज वाले व्यक्ति को यह हो सकती हैं , दिनचर्या अस्त-व्यस्त होना, पेट साफ न होना , पानी कम पीना आदि , इसके कारण भी गुदा दरार हो सकता है, कई बार इसमें बहुत तेज दर्द होता है ।

लक्षण :

  •  शौच के समय लाल रक्त निकलना
  • लगातार गुदा क्षेत्र में खुजली
  • तेज चुभन वाला दर्द होना
  • कब्ज रहना

दवाईयां :
होम्योपैथिक दवा में आप एनल फिशर के लिये Nux Vomica 30 की 5 बुँदे सिर्फ रात में (7 :00 pm) पर लें , इसके साथ Sulphur 30 की 5 बुँदे सवेरे खाली पेट लें, और Acid Nit . 30 की 5 बुँदे दिन में एक बार लेनी हैं , इनके साथ Aesculus Q की 15 बुँदे दिन में 3 बार लें होम्योपैथिक दवाओं के साथ ही साथ आप अपने खाने पीने का ख्याल भी रखें , साथ में खूब सारा पानी पिये , और जो दवाएं बताई गयी हैं उन्हें खाये आपका लाभ होगा।

homeopathic treatment for Belly Fat

Belly Fat , कमर की चर्बी का होम्योपैथिक उपचार

आजकल लोग मोटापे और बढ़ते वजन से तो परेशान हैं ही साथ में पेट की चर्बी भी उनके लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही हैं। बदलते लाइफस्टाइल और भागदौर भरी जिंदगी के अलावा खाने पीने की गलत आदते पेट और अन्य जगहों की चर्बी बढ़ने की मुख्य वजह हैं । यह तो सभी जानते है की शरीर में चर्बी कैसे जमती हैं , उनके क्या  कारण हैं । फिर भी लोगो को अपने लिए इतना वक़्त ही नहीं है, की थोडा टाइम निकाल कर योग, व्यायाम किया जाये , न खाने का सही वक़्त और न सोने का , इन दोनों ही कारणों से फैट बढता है ।

आज के इस विडियो में मै डॉ हरीश चन्द्र पाठक जी, जो योग एक्सपर्ट हैं, उनके द्वारा कुछ आसन से व्यायाम और कुछ  अपनी होम्योपैथिक दवा बताने जा रहा हूँ , आप अपनी दिनचर्या से थोडा सा वक़्त निकल कर योग व व्यायाम करें, चाहे वो वक़्त सुबह निकले या शाम को , शुरुआत में थोडा थोडा वक़्त दे , जैसे शुरू में 10-15 मिनट फिर धीरे धीरे इस वक़्त को आप बढ़ा सकते हैं, बस ये ध्यान रहे की योग करने से 1 से 2 घंटे पहले आप खली पेट रहे ।

दवाये : आप होमियोपैथी की Phytolacca Berry Q की आधे कप में २० बुँदे, 3 बार ( सवेरे , दिन में और शाम को ) लें । और साथ में खूब सारा शुद्ध पानी पीये ।

Homeopathic treatment for fistula

Fistula ,भगंदर का होम्योपैथिक उपचार

भगंदर इसे फिसुला भी कहते हैं। यदि बावसीर बहुत पुराना होने लगे तो यह भगंदर हो जाता है इसलिए बवासीर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए यदि समय पर इसका उपचार ना कराया जाये तो कई बार यह कैंसर का रूप भी ले सकता है। यह एक प्रकार से नाड़ी में होने वाला रोग है. जो गुदा और मलासय के पास के भाग में होता है। भगन्दर रोग अधिक कष्टकारी होता है। इस रोग में दोनों गुदे के आसपास दाने निकलकर फूट जाते हैं। जिस कारण रोगी को बहुत कष्ट होता है ना रोगी ठीक प्रकार से कोई काम कर पाता ना ही आराम कर पाता है।
लक्षण: गुदा में खुजल, सुई जैसी चुभन, असहाय दर्द, जलन व सूजन,आदि, लक्षण., इसके साथ नाड़ियों में लाल रंग का झाग निकलना इसके लक्षण है। इन्फेक्शन संक्रमण के कारण बुखार होना और ठंड लगना।
कारण: कब्ज रहना, गुदामार्ग के पास फोड़े होना, गुदासय का अस्वच्य रहना, बेक्टारिअल इंफेक्शन के कारण, ज्यादा समय तक किसी सख्त या ठंडी जगह पर बैठना, इसके अलावा यह रोग बूढ़े लोगों में गुदा में रक्त प्रवाह के घटने से होता है।
दवाइयां: Silicea 1m की दो बुँदे 10-10 मिनट के अंतर से ले, 3 बार (महीने में केवल एक बार )
Paeonia Officinalis Q आधे कप पानी में मिलाकर 15 बुँदे सुबह, दोपहर, और शाम को लें
अगर फिसुला में जलन है तो आप Paenia Q की जगह Iris VersiColor Q की आधे कप पानी में 15 बुँदे सुबह/ शाम को ले इनके साथ Cacl Flourica 6x की 4 गोली और इसके साथ मिलाकर Silicea 6x की 4 गोली सुबह, दोपहर, शाम को खाए यदि पस आ रहा है तो आप Gun Powder 3x और 6x की 2 गोली सुबह, शाम लें। आपको आराम मिलेगा।