Burning Feet Syndrome

पैरों में जलन होना एक बहुत ही आम समस्या है और ये समस्या किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में प्रभावित कर सकती हैं । जलन की भावना हल्‍के से लेकर गंभीर और तीव्र या क्रोनिक प्रकृति की हो सकती है। अक्सर, पैरों में जलन तंत्रिका तंत्र में नुकसान , कमी, किसी रोग या शिथिलता के कारण होती है।
देखा ये भी गया है की जिन लोगों में विटामिन, कैल्शियम, फोलिक एसिड आयरन , या थाइरोइड की कमी होती है उनमे ये समस्या आम होती है इसके अलावा किसी गंभीर बीमारी के कारण भी पैरों में जलन होती हैं.
यह समस्या कभी-कभी मधुमेह, शराब के अधिक सेवन और विषाक्त पदार्थों के जोखिम के साथ भी जुड़ी होती है।

पैरों में जलन के कारण

तंत्रिका तंत्र की कमी व किसी नुकसान के कारण पैरों में जलन होती है. पैरों में जलन के कई कारण हैं जानते है इसके कुछ सामान्य कारण :
गुर्दे से जुड़ी बीमारी
रक्तचाप
किसी गंभीर बीमारी के कारण जैसे मधुमेह, किडनी की समस्या
विटामिन, कैल्शियम और आयरन की कमी
रक्त वाहिकाओं में संक्रमण
शराब, धूम्रपान या किसी नशीले प्रदार्थ का सेवन करने के कारण
दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण

पैरों में जलन के लक्षण
पैरों में जलन होने पर व्यक्ति में कुछ लक्षण देखने को मिलते है जैसे :
पैरों में लाली , सूजन, जलन, झनझनाहट
शारीरिक कमजोरी
बदन में दर्द आदि लक्षण हाथ पैरों की जलन में दिखाई देते हैं

पैरों की जलन का होम्योपैथिक उपचार

पैरों की जलन होने पर कुछ होम्योपैथिक दवाओं का सेवन कर आप हाथ पाव की जलन से राहत पा सकते हैं.
Sulphur 6c, २ बुँदे सवेरे सवेरे निहार मुँह
Ferrum Metallicum 3x की 2 गोली दिन में 3 बार लें (२ गोली सवेरे, २ गोली दिन में, २ गोली शाम को )
Bio-Combination 1, ४ गोली दिन में ३ बार (४ गोली सवेरे, ४ गोली दिन में, ४ गोली शाम को )

इन दवाओं को उचित मात्रा में सेवन और सही समय पर इन दवाओं का सेवन करने पर आपको हाथ पाव की जलन में लाभ मिलेगा। साथ ही शराब का सेवन न करें और खाने में विटामिन की मात्रा बढ़ाये।

Cervical Spondylosis

सर्वाइकल का दर्द गर्दन की दर्द को कहा जाता हैं। गर्दन की हड्डी शरीर में उपयुक्त होने अली वाली एक महत्वपूर्ण हड्डी है। कभी कभी ये दर्द खुद ही ठीक हो जाता हैं लेकिन कभी कभी ये बिना डॉक्टर परामर्श व इलाज के बिना ठीक नहीं होता ये समस्या हड्डियों से जुडी हुई होती हैं और इस समस्या से हड्डियों में असहनीय दर्द होता हैं.
आज के दौर में अव्यवस्थित दिनचर्या और अनियमितताओं के कारण लगभग हर तीसरे व्यक्ति को सर्वाइकल की परेशानी सहनी पडती हैं। घंटों बैठे रहना, खराब पोश्चर, झुक कर बैठना और कई अन्य गलत आदतों की वजह से इस परेशानी का सामना बड़ी तादाद में लोगों को करना पड़ता है.

सर्वाइकल का दर्द के कारण :-
सर्वाइकल के दर्द के अनेक कारण हैं, जिनमे से कुछ कारण निम्न है, :-
बढ़ती उम्र के साथ सर्वाइकल का दर्द
किसी गंभीर बीमारी के कारण
किसी दुर्घटना के कारण हड्डियों में दर्द होना ‘
बैठने, उठने, सोने की गलत पोजीशन
गर्दन को झुका कर काम करना
शारीरिक व मानसिक तनाव
भारी वजन के हेलमेट का उपयोग करना
सोने के लिए ऊँचे या बड़े तकिये का इस्तेमाल
भरी सामान उठाने के कारण

सर्वाइकल का दर्द के लक्षण:-

सर्वाइकल दर्द के कई लक्षण देखे गए हैं जिनमे से कुछ सामान्य लक्षण निम्न हैं :-
शरीर में दर्द
चक्कर आना
सर में दर्द
उठने बैठने चलने या सोने में शरीर में दर्द
कमजोरी महसूस करना
मांसपेशियों में अकड़न
शरीर में ऐठन
शरीर के अंग का सुन्न हो जाना

सर्वाइकल के दर्द का होम्योपैथिक उपचार :-

Conium 30 की 5 बुँदे दिन में 3 बार, (5 बुँदे सवेरे, 5 बुँदे दिन में, 5 बुँदे शाम को )
Spondylitis की 5 गोली, दिन में 3 बार (5 गोली सवेरे, 5 गोली दिन में, 5 बुँदे शाम को )
Mag. Phos. 6x की 4 गोली , दिन में 3 बार (4 गोली सवेरे , 4 गोली दिन में, 4 गोली शाम को )
Theridon 30, चक्कर आने पर (4-4 गोली जल्दी-जल्दी लें)

सर्वाइकल के दर्द होने पर बताई गयी होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करें, साथ ही भारी सामान न उठाये, बैठने चलने और सोने का सही तरीका अपनाये।

ध्यान दे – दवाओं का सेवन बताई गयी विधि और मात्रा में ही करें, आप किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त हैं तो दवाओं का उपयोग करने से पूर्व अपने निकटतम विश्वसनीय होमोपथिक विशेषज्ञ से जरुर परामर्श कर लें।

Nightfall Treatement

स्वपनदोष

कई बार देखा गया हैं की अधिकतर पुरुष जब सवेरे उठते हैं तो उनको अपने अंडरवियर में चिपचिपा व गिला प्रदार्थ देखने को मिलता हैं ये स्वप्नदोष के कारण होता हैं
सोते समय स्वप्न में यौन क्रीड़ा या सेक्स संबंधी दृश्य देखने पर जननेन्द्रिय में उत्तेजना आती है और शुक्राशय में एकत्रित हुआ शुक्र निकल जाता है, इसे स्वप्नदोष (नाइट फाल) होना कहते हैं, स्वप्नदोष में व्यक्ति के दिमाग में कई तरह के यौन विषय उत्पन होते हैं जिस कारण उसका वीर्य निकल जाता हैं
यौन रोग विशेषज्ञों के मुताबिक़ नाईट फॉल अनेक कारणों से होता है जैसे हस्तमैतुन, मानसिक मैथुन, प्राकृतिक विरुद्ध मैथुन, अश्लील वातावरण और मादक चीज़ो का अधिक सेवन से नाईट फॉल हो जाता है।

स्वपन दोष के कारण
जानते हैं स्वप्न दोष के कुछ मुख्य कारण :-
ख़राब या मसालेदार खाना पीना
पेट में कब्ज
हार्मोन्स में बदलाव
विचारों में संयम नहीं कर पाना
साथी से दुरी के कारण
देर से शादी
मानसिक तनाव
यौन क्रीड़ा या सेक्स संबंधी कल्पनाएं

स्वप्नदोष के लक्षण
इस रोग के लक्षण वैसे तो कई है जो रोगी को महसूस होते है. चलिए जानते है कुछ सामान्य लक्षण:-
चेहरे का मुरझाना या चमक खत्म होना
शारीरिक कमजोरी , बैचनी
भूख न लगाना
नींद न आना
रात को नींद में वीर्य निकल जाना
कमर में दर्द
वीर्य में पतलापन
शीघ्रपतन
हाथ पैरों में जलन व कमजोरी जैसे लक्षण स्वप्नदोष में देखे जाते हैं

स्वप्नदोष का होम्योपैथिक उपचार :-
स्वप्नदोष का होमियोपैथी में कुशल उपचार उपलब्ध हैं. चलिए जानते हैं कुछ होम्योपैथिक दवाये जो स्वप्नदोष में काफी उपयोगी हैं.
Lycopodium Clavatus 30ch की २ बुँदे, दिन में ३ बार
Acidum Phosphoricum Q की 15 बुँदे, दिन में ३ बार लें
Bio-Combination 16 की 4 गोली, दिन में ३ बार लें

इन होम्योपैथिक दवाओं को समय से लें और दिमाग में अच्छे विचार लाये, इसके लिए आप योगा या ध्यान कर सकते हैं

Impotency Treatment

नपुंसकता

शारीरिक सम्बन्ध बनते समय कोई समस्या आये तो रिश्ते बिगड़ जाते है, और रिश्तो में तनाव आने लगता है। कई पुरुष एक बार के सेक्स में असफल हो जाने के कारण अपने आप को नपुंसक मानकर वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं और वे अपने मन में नपुंसकता का डर पैदा करके बुरी तरह से बेचैन और तनाव से भर जाते हैं।
मेडिकल के अंदर नपुंसकता को इंपोटेंसी भी कह सकते हैं। इस रोग में व्यक्ति मन के अंदर सेक्स के बारे में गलत विचार बनाए रखने की वजह से अपनी स्त्री को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है। इस समय में युवा पुरुष सबसे ज्यादा इंपोटेंसी जैसे रोग से ही पीड़ित हैं। दूसरी तरह की नपुंसकता को इनफर्टिलिटी यानि नपुंसकता कहा जा सकता है। इसके अंदर पुरुष अपनी स्त्री को संभोग क्रिया करके उनको संतुष्ट तो कर देगें मगर उन पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की मात्रा कम होने की वजह से या बिल्कुल भी न होने की वजह से वे संतान पैदा नहीं कर सकते हैं या वे संतान पैदा करने में नाकाम रहते हैं।

नपुंसकता के कारण व लक्षण
नपुंसकता के वैसे तो कई कारण व लक्षण हैं पर इसका कोई मुख्य कारण बता पाना थोड़ा मुश्किल हैं. चलिए जानते है कुछ सामान्य कारण व लक्षण :-
हार्मोन्स में बदलाव
बहुत जल्दी डिस्चार्ज हो जाना
सही तरीके से यौन क्रियाएं नहीं कर पाना
लिंग में कठोरता कम हो जाना या न हो पाना
बढ़ती उम्र
व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होना
बांझपन
कुछ गंभीर बीमारियाँ
अधिक मात्रा में शराब , धूम्रपान या किसी नशीले प्रदार्थ का सेवन करना
अधिक स्वपनदोष के कारण

नपुंसकता के लिए होम्योपैथिक उपचार :-

नपुंसकता के लिए होमियोपैथी में कुशल उपचार उपलब्ध हैं, जानते हैं होमियोपैथी में उपलब्ध नपुंसकता के लिए कुछ दवाये :-
Lycopodium 200, 5 बुँदे दिन में 2 बार (5 बुँदे सुबह, 5 बुँदे शाम को )
Acid Phos 30 की २ बुँदे, दिन में 3 बार (सवेरे, दिन में, शाम को )
Caladium S Q, 10-15 बुँदे दिन में 3 बार (सवेरे, दिन में, शाम को)

इन दवाओं को सही समय पर व सही मात्रा में लेने पर आप नपुंसकता से छुटकारा पा सेक्स लाइफ को एन्जॉय कर पाएंगे।

Stomatitis

stomatitis
मुँह या जीब में छोटे दाने या छालों को stomatitis कहा जाता है. ये छाले बेहद दर्दनाक होते है और इनके होने पर व्यक्ति अच्छे से खाना खाने में, पानी पिने में या बोलने में असमर्थ होता हैं हलाकि मुँह में छाले होना एक सामान्य तकलीफ है, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है। कुछ लोगों को ये छाले बार-बार होते हैं और परेशान करते हैं। ऐसे लोगों को अपनी पूरी डॉक्टरी जाँच करानी चाहिए, ताकि उनके कारणों का पता लगाकर उचित इलाज किया जा सके।

जानते है मुँह के छालों के कारण :-

मुँह में छालों के वैसे तो अनेको कारण हैं। पर मुख्य रूप से ये शरीर की अंदुरुनी समस्या के कारण होते हैं जिसे पेट की गड़बड़ी या पेट की गर्मी के कारण ।
सख्त या मासलेदार खाने का सेवन करने के कारण ।
बदहजमी या पेट की समस्याओं के कारण ।
बुखार के कारण, खराब खाने के कारण
हार्मोन्स में बदलाव
अधिक शराब, धूम्रपान का सेवन करने के कारण भी मुँह में छाले हो जाते हैं
किसी बीमारी के कारण या अंग्रेजी दवाओं के सेवन करने के कारण।
अधिक मात्रा में एंटीबॉयोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने से हमारी आंतों में लाभदायक कीटाणुओं की संख्या घट जाती है। नतीजतन मुँह में छाले पैदा हो जाते हैं।

मुँह में छाले होने के लक्षण

मुँह में छाले होने के कई लक्षण होते हैं जिनमे से कुछ सामन्य लक्षण निम्न हैं :
मुँह में लाल व दर्दनाक छाले
बोलने में, खाने में और पानी पिने में दिक्कत होना
छालो में जलन, झनझनाहट
मुँह या गले में इन्फेक्शन होना
बुखार आना आदि लक्षण मुँह में छाले होने में दिखाई देते हैं।

मुँह में छालों का होम्योपैथिक उपचार
Ranunculus Bulbosus 30ch, २-२ बुँदे,1-1 घंटे के अंतर से लें
Bio-combination 25, 4 गोली दिन में 3 बार ज्यादा होने पर आप इसे ६-७ बार भी ले सकते है

इन दवाओं के साथ मुँह के छाले होने पर मसालेदार खाना नहीं खाये, शराब व धूम्रपान का सेवन न करे, और खूब पानी पिए.

Irritable Bowel Syndrome (IBS)

Irritable Bowel Syndrome

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम एक आम बीमारी है और यह बड़ी आंत को प्रभावित करती है। इस समस्या को कई अन्य नामो से भी जाना जाता हैं जैसे स्पैस्टिक कोलन, इर्रिटेबल कोलन, म्यूकस कोइलटिस जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह आंतों को खराब तो नहीं करता लेकिन खराब होने के संकेत देने लगता है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को पेट में दर्द एवं मरोड़ होना, सूजन, गैस, कब्ज और डायरिया होना इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के मुख्य लक्षण हैं। अधिकतर रोगियों में तनाव के समय यह समस्या अधिक रहती है। तनाव होने पर आम तौर पर एड्रिनल ग्रंथियों से एड्रेनैलिन और कॉर्टिसॉल नाम के हार्मोनों का स्राव होता है। तनाव की वजह से पूरे पाचन तंत्र में जलन होने लगती है जिससे पाचन नली में सूजन आ जाती है और इस सबका नतीजा यह होता है कि पोषक तत्वों का शरीर के काम आना कम हो जाता है। तनाव होने पर आम तौर पर एड्रिनल ग्रंथियों से एड्रेनैलिन और कॉर्टिसॉल नाम के हार्मोनों का स्राव होता है। तनाव की वजह से पूरे पाचन तंत्र में जलन होने लगती है जिससे पाचन नली में सूजन आ जाती है और इस सबका नतीजा यह होता है कि पोषक तत्वों का शरीर के काम आना कम हो जाता है।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कई लक्षण हैं, जानते हैं इसके कुछ सामान्य लक्षण :-
कब्ज के साथ डायरिया भी होना।
सामान्य से अधिक पतला या सूखा मल निकलना।
पेट चिपक जाना।
पेट में दर्द व ऐठन ।
पेट के निचले हिस्से में दर्द और मरोड़ होना, भोजन करने के बाद पेट में मरोड़ और दर्द अधिक बढ़ जाना।
पेट में कब्ज होना।
गंभीर रूप से डायरिया से पीड़ित होना।
पेट में अधिक गैस बनना और सूजन होना
पेट में अलग-अलग तरह से मरोड़ और दर्द होना।
मल में श्लेष्म निकलना।
इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम से पीड़ित कुछ लोगों को पेशाब या यौन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कारण
इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कई कारण हैं, अलग अलग व्यक्तियों में इसके अलग अलग कारण देखे जाते हैं, जानते हैं इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कुछ समान्य कारण :-
तनाव इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का एक मुख्य कारण हैं
हार्मोन्स में बदलाव के कारण भी ये समस्या हो सकती हैं
कई गंभीर बिमारियों के कारण भी ये समस्या आती हैं

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का होम्योपैथिक उपचार :-

Nux Vomica की आधे कप पानी में 5 बुँदे रात में लीजिये,
इसके साथ Sulphur 30 की आधे को पानी में 5 बुँदे सवेरे खली पेट लें
Bio Combination 9 की 4 गोली, दिन में 3 बार ( सुबह , दोपहर और शाम ) लें
Holarrhena anti Q की आधे कप पानी में 15 बुँदे सुबह शाम को लें।

इन दवाओं को समय पर ले और सही मात्रा में लें साथ ही भरपूर्ण मात्रा में पोषण आहार ले, भोजन समय पर करें और चबा चबा कर करें , भोजन के तुरंत बाद सोये नहीं और खूब पानी पिए।

Alopecia Treatment

Alopecia
स्पॉट बाल्डनेस (सर के कुछ हिस्सों में बालों का नहीं होना) जिसको अलोपेसिया कहा जाता हैं, यह एक ऑटोइम्यून रोग हैं इसको गंजापन भी कहा जाता हैं I जिसमे सर के कुछ या संपूर्ण हिस्से से बाल झड़ जाते हैं। इसमें बाल ज्यादातर सिर की त्वचा से ही झड़ते हैं क्यूंकि इसमें शरीर, स्वयं को ही पहचानना छोड़ देता हैं एवं अपने ही ऊतकों को नष्ट कर डालता हैं, जैसे की वो कोई आक्रमणकारी हो। इस रोग के होने पर सिर पर एक या एक से अधिक गोल धब्बे में बालों के झड़ने शामिल है ये रोग एक फंगल रोग हैं और किसी रोगी का कंघा उपयोग करने से ये रोग आप तक भी पहुंच सकता हैं

अलोपेसिया के कारण :
एलोपेशीया एरेटा यानी अलोपेसिया की बीमारी होने के कई कारण हैं। जिनमे से कुछ कारण निम्न हैं ‘
आनुवांशिक कारण
मेनोपॉज, प्रेगनेंसी और थॉयराइड की समस्या होने पर हार्मोन में बदलाव होने से।
सिर की त्वचा में संक्रमण और रिंगवर्म होने के कारण।
कैंसर, अर्थराइटिस, हृदय रोग, गाउट (gout) और उच्च रक्तचाप की दवाओं के साइड इफेक्ट्स के कारण।
अलग-अलग हेयर स्टाइल बनाने और हॉट हेयर ऑयल ट्रीटमेंट के कारण
वजन घटने के कारण
अधिक तनाव एवं डिप्रेशन के कारण
उम्र बढ़ने के कारण
डायबिटीज की दवाएं खाने के कारण

अलोपेसिया के लक्षण :

सिर में जगह-जगह धब्बे के आकार से बाल पूरी तरह साफ हो जाना और गंजापन दिखना।
शरीर के विभिन्न अंगों और चेहरे के बाल झड़ना।
सिर के बालों का अधिक टूटना।
दाढ़ी और पलकों के बाल टूटना
सिर में सफेद स्पॉट और लाइन दिखायी देना।
नाखून टूटना और नाखून की चमक खत्म हो जाना।
नाखून पतले होकर टूटने लगना।
बाल झड़ने से पहले आमतौर पर सिर में खुजली और जलन होती है। ऐसा भी देखा गया है कि एलोपेशीया एरेटा या अलोपेसिया से पीड़ित करीब 30 प्रतिशत लोगों लगातार बाल झड़ने की समस्या का सामना करते रहते हैं।
अलोपेसिया का होम्योपैथिक उपचार:

Phosphorus की ३ dose २, 10 -10 मिनट के अंतर से 3 बार लें
Arnica ३०,की २ बुँदे दिन में ३ बार लें ,( सवेरे दिन में शाम को )(१५ दिन तक )
Arnica ३० लेने के 15 दिन बाद Pix Liquida 30ch, २ बुँदे दिन में ३ बार लें (१५ दिन तक ), और फिर से १५ दिन बाद Arnica ३० लें
Hair Mont Internal & External
Internal: २० बुँदे दिन में ३ बार आधे कप पानी के साथ
External : जहाँ बाल झड़ रहे हो उस जगह पर लगाए
Jaborandi q से प्रभावित एरिया को साफ करें।
बताई गयी दवाओं को सही समय और सही मात्रा में लें , साथ ही अपना कंघा न किसी को दे और न ही किसी और का कंघा इस्तेमाल करें।

Sleep Apnea/Snoring

खर्राटे

जब सोते हुए व्यक्ति के नाक से अपेक्षाकृत तेज आवाज निकलती है तो इसे खर्राटे लेना (snoring) कहते हैं। इसे ‘ओब्स्टृक्टिव स्लीप अप्निया’ कहा जाता है; अर्थात नींद में आपकी साँस में अवरोध उत्पन्न होता है।
खर्राटे भी कई प्रकार के होते हैं . कुछ लोगों की तो श्वांश नींद में पूरी तरह से अवरुध हो जाती है। यह एक गंभीर अवस्था है और लंबे समय में यह आपके हृदय और मस्तिस्क पर बुरा प्रभाव डालती है। इस अवस्था में नींद पूरी नहीं होती और व्यक्ति को दिन में भी थकान लगती रहती है।खर्राटे साँस अंदर लेते समय आते हैं , पुरुषों में ये समस्या सामान्य मानी जाती हैं।

खर्राटे के कारण :

खर्राटों का वैसे कोई विशेष कारण नहीं है परन्तु इसके सामान्य कारणो में नाक से लेकर श्वांश नली तक कोई भी कारण हो सकता।

कुछ लोगों को खर्राटे सर्दी के कारण व सायनस के कारण भी होती है, नाख के वायुमार्ग में रुकावट के कारण,
मोटापे के कारण खर्राटों की समस्या
ख़राब व कमजोर मांसपेशियां
धूम्रपान व शराब का सेवन करने के कारण
वृद्धावस्था के कारण भी खर्राटे आते है

खर्राटे के लक्षण :

जानते है खर्राटों के कुछ सामान्य लक्षण
सवेरे के समय सर में दर्द
दिन में ज्यादा नींद आना
गले में खराश
नींद में बेचैनी
उच्च रक्तचाप
रात में छाती में दर्द होना आदि लक्षण खर्राटे में देखे गए है

जानते हैं खर्राटों के लिए होम्योपैथिक उपचार :
खर्राटों के लिए होमियोपैथी में कुशल उपचार हैं , आप इन दवाओं का सेवन कर खर्राटों की समस्या से निजात पा सकते हैं :-
Kali Carb 200, की 2 बुँदे 10-10 मिनट के अंतर से 3-4 बार लें (अगर 15 दिन तक फायदा न हो दुबारा इसे खा सकते है )
Kali Carb 200 लेने के अगले दिन से Lemna Minor 30 की 2 बुँदे सुबह, दोपहर , शाम को लें,
इसके साथ Teucriium Marum Virum Q को आधे कप पानी में 10 बुँदे सुबह, दोपहर , शाम को लें

इन दवाओं के साथ साथ, शराब या धूम्रपान का सेवन न करें, और नियमित योग करें।

Slipped Disc

स्लिप डिस्क

स्लिप डिस्क को किसी बीमारी के रूप में नहीं देखा गया है बल्कि ये शरीर में तकनीकी खराबी की तरह देखा गया है जिसमे स्पाइनल कॉर्ड से कुछ बाहर को आ जाता हैं। डिस्क में मौजूद जैली या कुशन जैसा हिस्सा कनेक्टिव टिश्यूज के सर्कल से बाहर की ओर निकल आता है और आगे बढ़ा हुआ हिस्सा स्पाइन कॉर्ड पर दबाव बनाता है। कई बार उम्र के साथ-साथ यह तरल पदार्थ सूखने लगता है या फिर अचानक झटके या दबाव से झिल्ली फट जाती है या कमजोर हो जाती है तो जैलीनुमा पदार्थ निकल कर नसों पर दबाव बनाने लगता है, जिसकी वजह से पैरों में दर्द या सुन्न होने की समस्या होती है।

हमारे शरीर की रीढ़ की हड्डी में 26 कशेरुकाएं होती हैं। एक कशेरुका तथा दूसरे कशेरुका के बीच उपास्थि (कर्टिलेग) का पैड होता है जिससे वह अपने स्थान से हटती नहीं और एक-दूसरे के साथ रगड़ भी नहीं खाती। कभी-कभी यह पैड घिस जाता है तब ये कशेरुका अपने स्थान से हट जाती है और रगड़ खाती रहती है। इसी को कशेरुका का अपने स्थान से हट जाने को ही स्लिप डिस्क कहते हैं। इनके अपने स्थान से हटने के कारण इस स्थान की नर्व कशेरुकाओं के बीच दब जाने से दर्द करने लगती है।
बहुत से लोग कमर के किसी भी प्रकार के दर्द को स्लिप-डिस्क कह दिया करते हैं जो कि बिल्कुल सही नहीं है।

स्लिप डिस्क होने के कारण
गलत तरीके से काम करने,
गलत तरह से बैठ कर पढ़ने,
उठने-बैठने या झुकने से डिस्क पर लगातार जोर पड़ता है इससे स्पाइन के न‌र्व्स पर दबाव आ जाता है जो कमर में लगातार होने वाले दर्द का कारण बनता है
बढ़ती उम्र के साथ भी स्लिप डिस्क का खतरा बना रहता है
अत्यधिक शारीरिक श्रम, गिरने, फिसलने, दुर्घटना में चोट लगने, देर तक ड्राइविंग करने से भी डिस्क पर प्रभाव पड सकता है।
कैल्शियम की कमी के कारण भी स्लिप डिस्क होने का खतरा बना रहता है

स्लिप डिस्क के लक्षण
रीढ की हड्डी पर दवाब पड़ना।
उठने-बैठने और चलने-फिरने में दिक्कत होना।
कभी दर्द का बहुत जल्दी ठीक हो जाना और कभी बहुत देर तक बना रहना।
कमर की मांसपेशियां कमजोर हो जाना।
पैरों की उंगलियां का सुन होना।
प्रभावित अंग में जलन होना
चलने में दर्द होना
रात के समय दर्द का बढ़ना

स्लिप डिस्क के लिए होम्योपैथिक उपचार

जानते हैं स्लिप डिस्क के लिए होम्योपैथिक दवाये :

Arnica Montana 200ch, की ५ बुँदे दिन में २ बार , ५ बुँदे सुबह और ५ बुँदे शाम को
Symphytum Officinals Q, की १५ से २० बुँदे, आधे कप पानी के साथ लें
Magnesium Phos 6x , की ४ गोली दिन में ३ बार, ४ गोली सवेरे, ४ गोली दिन में और ४ गोली शाम को

इन दवाओं को लेने के साथ साथ आप नियमित व्यायाम करें, भारी वजन न उठाये, सही पोस्चर में बैठे या चले ।

Polycystic Ovarian Disease

जानें पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम और होम्योपैथिक उपचार

आजकल महिलाओं में पीसीओएस यानी पोलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्‍या बहुत तेजी से फैल रही है। पीसीओएस ओवरी में होने वाला एक प्रकार का सिस्‍ट है। शरीर में हार्मोन असंतुलन से पीरियड्स अनियमित होने से ओवरी में छोटे-छोटे सिस्‍ट बन जाते हैं। कुछ सालों पहले यह समस्या 30 से 35 साल के ऊपर की महिलाओ में ही आम होती थी परन्तु आजकल छोटी उम्र की लड़कियां भी इसका शिकर हो रही हैं। यह बीमारी आमतौर पर असंतुलित आहार, शारीरिक व्‍यायाम और पौष्टिकता की कमी, तनाव और कुछ खराब आदतों जैसे स्‍मोकिंग या शराब पीने के कारण होती है।

ओवरी में सिस्‍ट से लड़कियों की प्रजनन क्षमता पर विपरीत असर पड़ने लगता है। इसके अलावा वजन बढ़ना, शरीर पर अधिक बाल, चेहरे और पीठ पर मुंहासे, सिर के बालों का पतला होना, पेटदर्द आदि समस्‍या सामने आने लगती है। हालांकि पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की बीमारी कभी भी जड़ से खत्‍म नहीं हो सकती। इसे हमेशा कंट्रोल कर के रखना पड़ता है। पीसीओएस को कंट्रोल करने के कई इलाज मौजूद हैं, जिनमें से होम्योपैथिक चिकित्सा से पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को काफी हद तक सही किआ जा सकता हैं और आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। यह हार्मोनल असंतुलन को ठीक कर मासिक चक्र को नियमित करने में मदद करता है। इस समस्‍या से शरीर में तेजी से होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण उभरने वाले लक्षणों को होम्‍योपैथी के इलाज की मदद से प्रभावशाली रूप से कंट्रोल किया जा सकता है। होम्‍यापैथी इलाज से शरीर के हार्मोन हमेशा कंट्रोल में रहते हैं। केवल होम्‍योपैथी दवाओं से पीसीओएस का पूरा इलाज करना संभव नहीं है। इसके लिये तनाव और वजन को नियंत्रित करना, सही दिनचर्या और समय पर दवाई लेना भी जरुरी होता है।

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कई कारण हैं, चलिए जानते है कुछ सामन्य कारण
शरीर में बढ़ती सूजन के कारण
अनुवांशिकता है एक मुख्य कारण
इंसुलिन प्रतिरोधिता
डायबिटीज व पीरियड में भी अनियमितता है तो ऐसे महिलाओं में भी पीसीओएस होने की संभावना बढ़ जाती है।

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षण
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कुछ मुख्य लक्षणों के बारे में
चहरे पे अनचाहे बालों का बढ़ना
अनियमित माहवारी
महिलाओं में यौन इच्छा में अचानक कमी आ जाना
शरीर में सूजन व वजन बढ़ना
अधिक रक्तस्रव
गर्भधारण में मुश्किल होना
मुहांसे
बढ़ता वजन
डिप्रेशन
जैसे कई अन्य लक्षण पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में देखने को मिलते हैं

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिए होम्योपैथिक उपचार

होमियोपैथी में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिए काफी बेहतर दवाएं उपलब्ध है, जो पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम काफी हद तक कण्ट्रोल कर सही करते है, जानते हैं पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिए होम्योपैथिक दवाएं :

सबसे पहले आप Pulsatilla की 5 बुँदे सवेरे खली पेट लें, इसके साथ Janosia Ashoka Q की आधे कप पानी में 1o बुँदे , 3 बार (सवेरे , दिन में , शाम को ) लें । इसके साथ आप Ova tosta 3x की 2 गोली , 3 बार ( सवेरे , दिन में , शाम को) और B.C – 15 की 4 गोली सवेरे, दिन में और शाम को लें।

इन दवाओं को लेने के साथ साथ पोषण और फाइबर युक्त आहार लें और मानसिक तनाव से दूर रहें।