Dengue & Chikungunya

डेंगू
डेंगू एक प्रकार का बुखार है जो जानलेवा भी हो सकता है । यह बुखार एडीज मादा मच्‍छर के काटने से फैलता है यह मछर जमा साफ पानी में पनपता है, जैसे मटके में, गमले में, कूलर में जमे पानी में ये मछर पनपता है। डेंगू एक तरह का वायरल इन्फेक्शन है जिसमे ब्लड प्लेटलेट की संख्या कम हो जाती है।जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी रोगी को काटने के बाद किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो वह डेंगू वायरस को उस व्यक्ति के शरीर में पहुंचा देता है।
डेंगू के लक्षण
डेंगू के अनेक लक्षण देखे गए है, जिनमे से कुछ खास लक्षण है :
तेज बुखार, बदन टूटना डेंगू का प्रमुख लक्षण है।
शरीर में बहुत तेज दर्द होता है, विशेषकर जोड़ों और अस्थियों में।
सिर में बहुत तेज दर्द होता है।
हाथ-पैर में चकत्ते होना, खासकर दबे हुए हिस्‍से में।
मतली और उल्‍टी होना।
डेंगू में छोटे लाल चकत्ते या रैशेस हो जाते है।
जानते है डेंगू के लिए होम्योपैथिक दवाइयां
Eupatorium Per. की 2 -3 बुँदे , दिन में 3 से 6 बार लें
Children को 7 -10 ml, दिन में 3 से 5 बार लें ।
इन दवाओं को लेने से आपको डेंगू से रहत मिलेगी,साथ ही अपने आस पास स्वछता बनाये रखे और डेंगू के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें ।

Diabetes

डायबिटीज
डायबिटीज जिसे मधुमेह या शुगर के नाम से भी जाना जाता है ,भारत में शुगर के मरीजों की तादात हर वर्ष बढ़ते जा रही है शुगर को ३ प्रकारों में बाटा गया है
टाइप 1 डायबिटीज़: इन्सुलिन के न बनने के कारण जो डायबिटीज होता हैं , उसे टाइप 1 डायबिटीज के अंदर रखा गया है
टाइप 2 डायबिटीज़:शरीर में इन्सुलिन की कमी के कारण, जो डायबिटीज होता हैं, उसे टाइप 2 डायबिटीज के अंदर रखा गया है
गर्भावधि मधुमेह: गर्भावधि मधुमेह (जैस्टेशनल डायबिटीज) तब होती है, जब गर्भावस्था के दौरान गर्भवती स्त्री के खून में शर्करा (ग्लूकोस) की मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है
मधुमेह/ शुगर / डायबिटीज के कारण
मधुमेह के कई कारण हैं चलिए जानते है मधुमेह के कुछ मुख्य कारण
मधुमेह के कारणों में एक मुख्य कारण अनुवांशिक कारण हैं, यदि माता पिता को मधुमेह है तो सम्भावना है उनके बच्चों को भी मधुमेह हो जाये
मोटापा या जरूर से ज्यादा वजन बढ़ना भी मधुमेह का एक मुख्य कारण है
बढ़ती उम्र के साथ भी कई लोगों में ये रोग पाया जाता है
मानसिक तनाव के कारण भी मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है
जरूरत से ज्यादा दवाओं का सेवन , या नशा करना , धूम्रपान ,शराब का सेवन भी मधुमेह या शुगर जैसी बीमारी पैदा करता है
व्यायाम की कमी के कारण या गर्भवस्ता में भी शुगर होने का खतरा रहता हैं
मधुमेह/ शुगर / डायबिटीज के लक्षण
मधुमेह के कई लक्षण देखे गए है, जिसमे से कुछ मुख्य लक्षण है :-
मधुमेह में शरीर में पानी की कमी हो जाती है , जिस कारण प्यास अधिक लगती है ।
शरीरिक कमजोरी महसूस करना और भूख ज्यादा लगना ।
शरीर के घाव पुरे होने में देरी होना ।
वजन की कमी, आँखों की रोशिनी काम होना, बार बार पेशाब आना, बाल गिरना , त्वचा में इन्फेक्शन , शरीर में रूखापन और खुजली आदि लक्षण ।
मधुमेह के लिए होम्योपैथिक उपचार
मधुमेह एक गंभीर रोग है जिस कारण रोगी के शरीर के कई अंगो को नुकसान पहुँचता है।
होम्योपैथिक उपचार से, खान पान का ख्याल रख, व्यायाम कर और कुछ चीजों से परहेज कर रोगी न सिर्फ शुगर को कण्ट्रोल कर सकता है बल्कि अन्य अंगों में नुकसान होने से भी बचा सकता है।
जानते है शुगर के लिए कुछ होम्योपैथिक दवाएं :
Syzygium jambolanum Q की 10 बुँदे, दिन में तीन बार ( 3 बुँदे सवेरे, 3 बुँदे दोपहर
में, 3 बुँदे रात में )
Pancreatinum 3x या 6x, 2 गोली दिन में तीन बार ( 2 गोली सवेरे, 2 गोली दोपहर
में, 2 गोली रात में )
Bio-Combination 7 की 4 गोली सवेरे, 4 गोली दिन में , 4 गोली शाम को लें ।
इन होम्योपैथिक दवाओं को समय से और सही मात्रा में लें और खान पान का ध्यान रखे ।

Stomach Cramps

पेट की मरोड़

पेट का मरोड़ वैसे तो सामान्य परेशानी है। पेट के ऊपरी या निचले हिस्से में दर्द की भावना को पेट में दर्द कहा जाता है। पेट का दर्द के कई कारण हो सकते है, किसी गंभीर बीमारी के कारण, आंतो के विकार कारण, गुर्दे की परेशानी कारणों से पेट दर्द की समस्या पैदा होती है।
पेट में दर्द के मुख्य 3 प्रकार होते है : सामान्य पेट दर्द, स्थानीय दर्द, और ऐंठन

पेट दर्द के कारण
गैस्ट्राइटिस, लीवर में खराबी, आमाशय में छेद होने के कारण पेट का दर्द पैदा होता है। पित्त की थैली में पथरी होने पर आमतौर पर पेट के दाएं तरफ दर्द होता है।
अकसर पैन्क्रियाज की खराबी के कारण पेट के बीच में दर्द होता है। महिलाओं में पेट के निचले हिस्से में दर्द के कई कारण हो सकते हैं जैसे गर्भाशय में किसी तरह की खराबी, फाइब्रायड, एंड्रीयोमेट्रीयोसि‍स, माहवारी या कोई अन्य बीमारी ।
पेट के एक तरफ दर्द का कारण गुर्दे में पथरी या गुर्दे की अन्य कोई बीमारी हो सकती है। एसीडिटी या अल्सर की शिकायत होने पर पेट के बीचो बीच अधिक दर्द होता है।
आंतों में सूजन भी पेट दर्द का कारण होती है इसके कारण पेट दर्द असहनीय हो जाती है।
पेट में दर्द के कई अन्य कारण भी है जैसे :
फ़ूड पोइज़निंग
अल्सर
पथरी
मूत्र पथ में संक्रमण
अपच
कब्ज, दस्त आदि
पेट दर्द के लक्षण
देखा जाये तो पेट में दर्द अपने आप में ही बीमारी का एक लक्षण है,बार बार पेट में उठता दर्द किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है और ऐसे में बिना दरी किये जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए
पेट में दर्द के लिए होम्योपैथिक उपचार
पेट का दर्द किसी भी कारण हो, होमियोपैथी में इसका सफल उपचार उपलब्ध है:
Dysentry co 30 को 2-2 बुँदे, 3 बार ( 2 बुँदे सवेरे, 2 बुँदे दिन में , 2 बुँदे शाम को ) लगातार 15 दिन के लिए लें।
Bio-Combination 3 की 4 गोली सवेरे, 4 गोली दिन में , 4 गोली शाम को लें ।
Bio-Combination 8 की 4 गोली सवेरे, 4 गोली दिन में , 4 गोली शाम को लें ।
इन दवाइयों को बताई गयी मात्रा में , और समय पर ले इनसे आपको पेट दर्द में लाभ मिलेगा इसके अलवा खूब पानी पिए और हरी सब्जी खाये ।

sahas Homeopathic

KIDNEY STONES

किडनी स्टोन्स

किडनी स्टोन्स को गुर्दे की पथरी भी कहा जाता है। रोजमर्रा की भागदौड़ और अव्यवस्थि‍त लाइफस्टाइल के चलते बहुत से लोग किडनी स्टोन के मरीज बन चुके हैं. पथरी का दर्द जब उठता है तो वो असहनीय हो जाता है इसके कारण पेशाब में संक्रमण व किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए किडनी स्टोन यानि गुर्दे की पथरी का उपचार जरुरी है।

गुर्दे की पथरी के कारण
किडनी स्टोन्स का मुख्य कारण गलत खान-पान व जरुरत से कम पानी पीना हैं ।
कुछ लोगों में अनुवांशिकता के कारण भी गुर्दे की पथरी होने की समस्या रहती है।
कुछ पुरानी बीमारियां गुर्दे की पथरी का कारण हो सकती है।
30 से 50 वर्ष की आयु के पुरुषों में गुर्दे की पथरी पायी जाने की संभावना अधिक देखी गयी है।

गुर्दे की पथरी के लक्षण
पीठ की तरफ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द अचानक शुरू होना ।
पेशाब में खून आना ।
सामान्य से अधिक बार पेशाब आने की इच्छा होना परन्तु एक बार में थोड़ा सा ही पेशाब आना।
पेशाब करते समय दर्द महसूस करना या पेशाब करने में कठनाई महसूस करना ।
जैसे कुछ लक्षण पथरी के मरीज में पाए जाते है ।

गुर्दे की पथरी का होम्योपैथिक उपचार

गुर्दे की पथरी होने पर सबसे पहले तो अतिरिक्त मात्रा में पानी पिए साथ ही कैल्शियम , सोडियम युक्त आहार लें , पथरी बनाने वाले खाघ प्रदार्थ जैसे कद्दू, बैगन,अमरुद, चुकंदर, पालक, चॉकलेट, चाय,दूध, टमाटर आदि प्रदार्थो से बचे या इन्हे कम से कम लें ।
इसके साथ ही होमियोपैथी में पथरी का कुशल उपचार सम्भव है, इसलिए होम्योपैथिक उपचार को जरूर अपनाये, होमियोपैथी की दवाओं को बताई गयी मात्रा में समय पर लेने से आपको पथरी से तुरंत राहत मिलेगी तो चलिए गुर्दे की पथरी के लिए जानते है होम्योपैथिक दवाइयाँ :
Calcarea Renal 6 , की दो-दो बुँदे, दिन में 3 बार (२ बुँदे सुबह , २ बुँदे दिन में और २ बुँदे शाम को लें )।
Berberis vulgaris Q , की 15-20 बुँदे, दिन में चार बार लें, 1 गिलास पानी में मिला कर।
Sbl कंपनी की Clearstone, की 20 बुँदे सवेरे, 20 बुँदे दिन में, 20 बुँदे शाम को लें. इन दवाओं को सही मात्रा व समय पर लेने से आपको बेहद लाभ मिलेगा।

Arthritis Pain

क्या आपके जोड़ों में दर्द रहता है ? क्या आपके जोड़ों में सूजन रहता है ? यदि हाँ तो सावधान हो जाये ये गठिया रोग यानी अर्थराइटिस भी हो सकता है। अर्थराइटिस, जिसे संधि शोथ भी कहा जाता है, एक प्रकार के जोड़ों की सूजन होती है। जब हड्डियों में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो ये गठिया का रूप ले लेता है। यह एक या एक से अधिक जोड़ों को प्रभावित कर सकती है। गठिया 65 वर्ष से अधिक उम्र वालों में देखा जाता है, हालांकि यह बच्चों टीनएजर और युवाओं में भी विकसित हो सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिकतर इस रोग को देखा जाता है, खासतौर पर उन में जिनका वजन ज्यादा हो।
अर्थराइटिस में सूजन के साथ दर्द और उंगलियों, बाजुओं, टांगों और कलाइयों में अकड़न व मरोड़ सी होती है और यही गठिया के मुख्य लक्षण भी है। इसमें शरीर के जोड़ों में काफी दर्द होता है। यह दर्द सुबह के समय ज्यादा प्रभावित होता है ।

गठिया के प्रकार:

गठिया मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है
ओस्टियो आर्थराइटिस : यह ऑस्टियो आर्थराइटिस सबसे आम प्रकार का अर्थराइटिस है। यह बढ़ती उम्र के साथ होता है। यह अंगुलियों और कूल्हों के अलावा पूरे शरीर का भार सहन करने वाले घुटनों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इस समस्‍या के होने पर घुटनों में सूजन और चलते समय घुटने में तेज दर्द होता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस : यह गठिया का बहुत अधिक पाया जाने वाला गंभीर रूप है। इस अर्थराइटिस का समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्‍यक होता है वरना बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान हो जाता है।
मेडिकल साइंस की भाषा में इसे आटो-इम्यून डिजीज यानी स्‍व-प्रतिरक्षित बीमारी कहा जाता है।ठण्ड के कारन इस बीमारी का दर्द असहनीय हो जाता है ।

गठिया के लक्षण :
गठिया के किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है। इस सूजन के चलते जोड़ों में दर्द, जकड़न और फुलाव होने लगता है। रोग के बढ़ जाने पर तो चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है।

गठिया के कुछ अन्य मुख्य लक्षण है :

जोड़ों में सूजन आ जाना।
जोड़ों में दर्द रहना।
घुमाने या मूव करने में परेशानी होना।
जोड़ों को घुमाने–फिराने में देर लगना।
जोड़ों में भारीपन आ जाना।
जोड़ों में सूजन आ जाना।
जोड़ों में दर्द रहना।
घुमाने या मूव करने में परेशानी होना।
जोड़ों को घुमाने–फिराने में देर लगना।
जोड़ों में भारीपन आ जाना।

गठिया का होम्योपैथिक उपचार :

होमियोपैथी में गठिया का कुशल उपचार सम्भव है। बस शर्त है आप दवाइयों को जैसे बताई गयी है उसी तरह है, और उसी मात्रा में लें :

Polyarthritis 10m : Polyarthritis 10m की sugar milk में 6 Dosage (पुड़िया) बनवा ले, इन पुड़िया को आपको 2 दिन तक , 3 बार लेना है (1 पुड़िया सुबह, 1 दोपहर, 1 शाम) ।
बायो कॉम्बिनेशन 19 (Bio-Combination 19 ) की 4 गोली , 3 बार (4 गोली सुबह , 4 गोली दिन में , 4 गोली शाम को) ।
Adel 4 की 20 बुँदे, दिन में 3 बार, (20 बुँदे सुबह, 20 बुँदे दिन में, 20 बुँदे शाम को )आधे कप पानी के साथ मिला के लें ।

Cold and Flu in Kids

(फ्लू) वायरल बुखार है जो सर्दियों के दौरान बच्चों में आम तौर पर हो जाता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने की वजह से बच्चे इसका शिकार जल्दी हो जाते हैं। अचानक बुखार हो जाना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और बेचैनी के साथ साथ खराब गला, सरसराहट, नाक बहना और सांस प्रणाली की समस्याएं होना आदि सामान्य फ्लू के लक्षण हैं। बच्चों में फ्लू के लक्षण जुकाम और सांस प्रणाली के ऊपरी हिस्से के संक्रमण जैसे ही होते हैं। इससे मिचली, उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं। 

‘फ्लू बहुत तेजी से फैलता है, खासकर तब जब बच्चे स्कूल के बंद कमरों में रहते हैं। जब किसी की छींक या खांसी से निकले नमी कण हवा के जरिए फैलते हैं तो सांस के जरिए दूसरे बच्चों के अंदर भी चले जाते हैं या फिर जब बच्चे नाक से बहने वाले मवाद या संक्रमित थूक के संपर्क में आते हैं। आज इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए कुछ होम्योपैथिक दवाएं बताने जा रहा हूं इससे समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।

Nisikind (4 टेबलेट दिन में 3-6 बार)

Homeopathic consultation image

Synostosis

कुछ लोगों को हमेशा सर्दी-जुकाम की शिकायत रहती है। यह मामले अधिकतर साइनोसाइटिस यानी साइनस के होते हैं। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह क्या है? दरअसल, हमारी खोपड़ी में बहुत-सारी कैविटीज़ (खोखले छेद) होती हैं। ये हमारे सिर को हल्का बनाए रखने और सांस लेने में मदद करती हैं। इन छेदों को साइनस कहते हैं। अगर इन छेदों में बलगम भर जाती है तो सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इस समस्या को ही साइनोसाइटिस कहते हैं। आम बोलचाल में इसे साइनस भी कहा जाता है। पिछले कई सालों में इस बड़ी संख्या लोग इस बीमारी का शिकार हुए जिन लोगों को एलर्जिक साइनस होता है, उन्हें पोलन सीजन और सर्दियों में स्मॉग होने पर समस्या बढ़ने का खतरा रहता है। पहले जुकाम और प्रदूषण की वजह से गले में खिचखिच पैदा होती है। इसी के साथ नाक बंद होना, नाक बहना और बुखार जैसी शिकायतें होने लगती हैं। अगर ये लक्षण कई दिनों तक बने रहें तो ये एक्यूट साइनस हो सकता है। अगर यह समस्या बार-बार होने लगे या तीन महीने से ज्यादा समय तक बनी रहे तो यह क्रॉनिक साइनस हो सकता है। आज वीडियो के माध्यम से आपकों इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए कुछ होम्योपैथिक दवाएं बता रहा हूं।

दवाएं
• Lemna Minor 30 ( दो-दो बूंदे दिन में तीन बार )
• Sino Care (20-20 बूंदे दिन में तीन बार )

Melasma treatment in homeopathy

Melasma

यदि किसी के चेहरे पर झाइयां हो तो कही न कही यह उनके आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है। चेहरे पर पड़ने वाली झाईया को मेलाज्मा भी कहा जाता है, जब झाइयां ज्यादा बढ़ जाती है तो ये स्थिति उत्पन होती है ।
चेहरे पर पड़ने वाली झाइयों का कारण आपके पेट में गड़बड़ी को भी दर्शाता है झाइयां दूर करने के लिए इन्सान का अन्दर से स्वस्थ रहना भी जरुरी है। इसके लिए आपको संतुलित आहार, चैन की नींद, भरपूर्ण पोषण व ढेर सारा पानी पिने की आवश्यकता होती है, अपने आहार में दूध दही हरी पत्तेदार सब्जी सेब और सलाद आदि को शामिल करें ।
झाइयां होने पर सभी बाहरी पोषण पर तो ध्यान देते है परन्तु शरीर के अन्दर के पोषण की तरफ किसी का ध्यान नही जाता है, अन्दर के पोषण का अर्थ हमारे खान पान को लेकर है शरीर में आये हार्मोनल बदलाव के कारण यह होता है उस समय शरीर को पोषण तत्वों की भी आवश्यकता है, कई बार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में ये स्थिति ज्यादा देखने को मिलती है, इसलिए आपनी सेहत का ध्यान रखना बहुत जरुरी है। वैसे हमारा झाइयों पर विडियो बन चूका है, परन्तु आज इनकी आगे की स्थिति यानि झाइयां चेहरे में कही भी जैसे गलों पर, माथे पर, नाक आदि में काफी मात्रा में बढ़ जाता है तो इस स्थिति में आप होम्योपैथिक दवाइयों का प्रयोग करें ।

दवाइयां : Sepia 30, में 2 बुँदे सुबह, दोपहर, शाम को दे (केवल 10 दिन ) इसके साथ B.c की 4 गोली और Ferrum Meto 3x की 2 गोली एक साथ मिला कर दे, सुबह दोपहर , शाम। इसके साथ Berberis Aquitolium Q की आधे कप पानी में 10 से 15 बुँदे सुबह, दोपहर, शाम को दें ।

whooping cough treatment

Whooping cough treatment in homeopathy

कुकुरी या कुक्कुर या काली खांसी अंग्रेजी में व्हूपिंग कफ, एक जीवाणु के संक्रमण द्वारा होता है। वैसे यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है परंतु अधिकतर यहां 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों की स्वास प्रणाली को प्रभावित करता है। जब भी इस रोग से पीड़ित रोगी खांसते हैं, तो उस समय भोंकने जैसी आवाज आती है। इसलिए इसका नाम कुकुर खांसी पड़ा। यह परटूसिस नामक जीवाणु के कारण होता है और जब भी किसी संक्रमण व्यक्ति द्वारा खांसा या छींका जाता है तो स्वस्थ व्यक्ति पर इन जीवाणुओं का संक्रमण फैल जाता है।

लक्षण:
साधारणतय शुरुआत सर्दी जुखाम गले में दर्द के साथ होती है, बुखार आना, खांसी के साथ म्यूकस निकलना. अधिकतर रात के समय इसका प्रकोप बढ़ता है, खांसी का दौरा जैसा पड़ना, खासते खासते रोगी को उल्टी तक हो जाना. थकान महसूस होना. सास बंद हो जाना, गले की नसें फूल जाना, आंख से पानी बहना, आदि लक्षण प्रकट हो प्रकट होते हैं।

कारण :
कुकुरी खासी परटूसिस के संक्रमण से होती है, अधिक सर्दी लगने पर, पानी में अधिक भीगने के कारण, कुछ केस में मूंगफली, अखरोट, मेवा घी आदि चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थ खाते हैं, जिस कारण खांसी होने का खतरा बढ़ जाता है।

दवाइयां :
कफ होने पर आप सबसे पहले Aconite 30 की दो बूंदें 10-10 मिनट के अंतर से सवेरे और दो बूंदें 10-10 मिनट के अंतर से शाम को लें ( केवल 1 दिन)। इसके दूसरे दिन Drosera 30 की दो बूंदें सुबह दोपहर शाम को दें (केवल 10 दिन) तक । इसके साथ-साथ Justicia Q को पानी में मिलाकर 10-15 बुँदे , 3 बार (सुबह दोपहर शाम) को दें।

Homeopathic treatment for side-effects of tobbaco

Tobacco Side-effect ,तम्बाकू के दुष्प्रभाव का होमियोपैथी उपचार

नशा एक ऐसी बीमारी है जो हमे और हमारे अपनों को जीवन भर रुलाने की वजह होती हैं। आज हर समाज के लोग व हर उम्र के लोग नशे की चपेट में आते जा रहे है , बड़े तो बड़े वर्तमान में युवा व बच्चों के साथ साथ महिलाएं भी नशे की लत की आदि होती जा रही है । तम्बाकू का सेवन धुम्रपान के रूप में करने से सांस की नाली में ऐसा नुकसान पहुचता हैं की यदि एक बार वह हो गया तो वह आपका पीछा नही छोड़ सकता।

आज लोग कई कारणों से तम्बाकू का सेवन करना शुरू करते है , कई तनाव कम करने के लिए तो कोई गुस्सा कम करने के लिए।  लोग यह पढते तो जरुर हैं की तम्बाकू खाना स्वस्थ के लिए हानिकारक हैं , परन्तु फिर भी खाये जा रहे हैं।

सिगरेट, पान , बीडी , गुटखा आदि तम्बाकू किसी भी रूप में लिया जाये इन सबसे नुकसान निश्चित हैं। तम्बाकू का नशा कई एक समस्या ना होकर कई समस्याओ की जड़ है यह ना केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से व्यक्ति को बीमार कर रहे हैं।

तम्बाकू में ऐसे तत्व होते हैं, जिनसे कैंसर हो सकता हैं , तम्बाकू के प्रयोग से मुँह व गले का कैंसर होने का खतरा रहता हैं। इसका ज्यादा प्रयोग ब्लड प्रेशर को बढाता हैं, इनसे दांत व मसूड़े सड़ते हैं , गैस बनती हैं , अनिद्रा आदि रोगों को खतरा होता हैं ।

दवा :
आप होमियोपैथी की Nicatinum 30 की 2 dram गोली लें, और इस दवा की 4  गोली दिन में 3 बार (सवेरे , दिन में , और शाम को )इसके साथ आप Liv-T सिरप की 2.5 ml 3 बार (सवेरे , दिन में , और शाम को ) खाना खाने के आधा घंटे पहले लें। Nicatinum 30 को एक बार 2 dram खाने के बाद बंद कर दें , फिर इसके बाद 20 दिन बाद दोबारा ले सकते हैं ।